Hawa Ko Behne Do
Hawa Ko Behne Do
Kamna Singh
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उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के बाल-साहित्य पुरस्कार से सम्मानित लेखिका कामना सिंह की बीस कहानियों का संग्रह है 'हवा को बहने दो'। इन कहानियों में आम आदमी के जीवन-संघर्ष का दाह-ताप, जीवन के भयावह और जीवन की इंद्रधनुषी छटा और इंसान की जिजीविषा का वर्णन है। 'सुप्रभात' जिसमें प्यार में धोखा मिलने पर भी नारियाँ टूटती नहीं हैं, बल्कि उस वंचना (धोखा) को एक बोझिल एवं संत्रासदायक काली रात समझकर नये-सुरम्य सुप्रभात की प्रतीक्षा करती है। यह नारी-विमर्श अन्य कहानियों में भी है और रुचिपूर्वक ग्रहीत किया गया है। 'बर्फ की रानी' भी एक प्रौढ़ वय की नारी की हताशा का चित्र है । 'तार सप्तक' में एक स्कूली बच्चों के दैहिक शोषण की व्यथा-कथा होने के साथ-साथ रक्षक के ही भक्षक होने की त्रासदी अंकित है। शीर्षक कथा 'हवा को बहने दो', 'और मंजुला चली गई', 'आँखे हुई चकोर' और 'सावनी आकाश' में भी विपरीत परिस्थितियों से टकराते हुए अंतत उसका जयघोष है। ' मंगलाचरण में उपेक्षा का दंश झेलने वाले हिंजड़ो की मानवतावादी दृष्टि उद्घाटित है। 'पराठे वाली गली', 'एक और परीलोक', 'पापा ऐसे ही हैं', 'मुझे बड़ा नहीं होना', 'नया मोबाइल', 'धुरी' आदि कहानियों में घर-परिवार के चित्र के साथ-साथ बचपन और किशोरवय की मन-स्थिति की व्यंजना है। समाज के निम्न वर्ग के प्रति भी एक सहज संवेदना के चलते 'हरी आँखें', 'सुलेमानी अंगूठी' लिखी गयी हैं जीवन-मूल्यों के अवमूल्यन को आप 'खंडित छवि' और 'एक ही बिरादी' में देखेंगे। सभी कहानियाँ सरल, सुबोध भाषा शैली में स्वयं को पाठकों से पढ़वाये जाने में सफल होंगी।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789381312070
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
No. of pages
No. of pages
256
Book Dimension
Book Dimension
22.5 cm x 15 cm x 1.5 cm
Item Weight
Item Weight
530 grams
