Skip to product information
1 of 2

Himachal Ke Darshniya Sthal

Himachal Ke Darshniya Sthal

Sudarshan Vashisth

SKU:

भारतवर्ष एक अनूठा देश है जिसमें सांरकृक्तिक और भौगोलिक, दोनों तरह की विविधताएं हैं। एक ओर तो नगाधिराज हिमालय है तो दूसरी ओर विशाल समुद्र। इनके बीच पृथ्वी अनेक आश्चयों से भरी पड़ी है। पर्वत से समुद्र तक अनेक रहस्यमयी भूमियां हैं।

हिमालय भारत की आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृक्तिक चेतना का आदि स्त्रोत रहा है। देवताओं के मूल बास की स्थली, ऋषि-मुनियों के चिंतन की भूमि, संत महात्माओं की तपोभूमि आदि काल से मनीषियों की कर्मभूमि रही है।

मैदानों के नारकीय जीवन से दूर निर्जन एकान्त में चिंतकों और साधकों ने हिमालय में रवर्ग ढूंढा और इसे अपनी साधना स्थली बनाया। हिमालय में हिमाचल प्रदेश को आज भी 'देवभूमि' कहा जाता है। यहां हर गांव में कोई न कोई देवता स्थापित है।

यहां अनेकों मन्दिर, धार्मिक और सांरकृक्तिक और प्राकृक्तिक स्थल विद्यमान हैं। प्रकृक्ति की गोद में बसा हिमाचल, हिमालय का ही पर्याय है जहां इन्द्रपुरी, अलकापुरी और शिवपुरी जैरो देवस्थान रहे। यह भू भाग वैदिक और पौराणिक काल से ऋषि-मुनि, चिंतक साधकों के आकर्षण का केन्द्र रहा। इसीलिये यहां अनेकों ऐसे स्थान विद्यमान हैं जो अलोकिक और आध्यात्मिक शान्ति प्रदान करते हैं।

इस अद्भुत प्रदेश के सांस्कृक्तिक स्थलों का परिचय यायावरी प्रकृति के खोजी संस्कृतिकर्मी सुदर्शन वशिष्ठ अपने मानवीय संवदेना और कथात्मक शैली में रोचकता पूर्वक दे रहे हैं। आशा है यह पुस्तक जहां एक ओर सांस्कृतिक स्थलों का परिचय करवाएगी वहां इधर की सम्पूर्ण देव संस्कृति के दर्शन भी करवाएगी।

Quantity
Regular price INR. 695
Regular price INR. 695 Sale price INR. 695
Sale Sold out
Shipping calculated at checkout.

Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392708619

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults
View full details