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Himalay Yudh 1962

Himalay Yudh 1962

Rampal Singh

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15 अगस्त, 1947 को जिस भारतीय भू-भाग की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नेहरू को सौंपी गई, उसका क्या हुआ? उस समय भारत की सीमाएँ चीन से नहीं मिलती थीं बल्कि भारत और चीन के बीच तिब्बत उपनिवेश था। अगर तत्कालीन सरकार ने तिब्बत की सुरक्षा में योगदान दिया होता तो भारत को सन् 1962 जैसे शर्मनाक युद्ध का सामना चीन से नहीं करना पड़ता। जब देश आजाद हुआ तो भारत की कूटनीति, सुरक्षा करने में असफल रही। चीन, भारत से दो वर्ष बाद स्वतंत्र हुआ था। वह भी भारत की भाँति साम्राज्यवादी ताकतों का गुलाम था परन्तु सन् 1949 में माओ के नेतृत्व में कम्युनिस्ट क्रांति की सफलता के बाद, साम्यवादी सरकार की स्थापना हुई। भारत विश्व का पहला देश था जिसने चीन की साम्यवादी सरकार को मान्यता प्रदान की। क्या चीनी नेतृत्व ने स्वतंत्र भारत सरकार को मान्यता प्रदान की थी? भारत की तिब्बत संबंधी नीतियाँ आत्मघाती साबित हुईं। चीनी सरकार को मान्यता देने से पूर्व उसे चीन से तिब्बत के बारे में दोटूक बात करनी थी। भारत को चीन से कहना था कि वह बाहरी मंगोलिया की तरह तिब्बत को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता प्रदान करे और अगर ऐसा कूटनीतिक आधार पर संभव नहीं हो पा रहा था तो फिर भारत को तिब्बत से भूटान जैसी संधि करना आवश्यक था जिससे कि हमारा कभी भी चीन से सीमा- विवाद नहीं होता क्योंकि भारत और चीन के बीच तिब्बत स्थित था। चीन की तत्कालीन परिस्थिति इस प्रकार की द्योतक थी कि वह हिमालय क्षेत्र में अवश्य ही कब्जा करना चाहता है। चीन की विस्तारवादी नीति का अर्थ था कि वह इस क्षेत्र पर विवाद करे क्योंकि तिब्बत एक कमजोर उपनिवेश है जिसे आसानी से निगला जा सकता है। तिब्बत के विनाश के लिए पं. जवाहर लाल नेहरू की कूटनीति जिम्मेदार है। हमारे और चीन के बीच में तिब्बत स्वतंत्र उपनिवेश था। हमारी और चीन की कोई सीमा नहीं मिलती थी।

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Regular price INR. 556
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9788195380671

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults

No. of pages

224

Book Dimension

22.5 cm x 15 cm x 1.8 cm

Item Weight

490 grams

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