Jallianwala Bagh Hatyakand
Jallianwala Bagh Hatyakand
Rampal Singh, Bimla Devi
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दुनिया में जितनी क्रांति हुई उनका अपना अलग-अलग इतिहास है। अलग-अलग देश अपनी क्रांति के संबंध में प्रतिवर्ष नई जानकारी, नई अनुभूति, रिसर्च के माध्यम से अपने देश की जनता को कराते हैं जिससे कि उनका इतिहास जीवित बना रहे, जबकि हमारे देश में इतिहास को भूलने की आदत है। श्री राममनोहर लोहिया का कथन कि जो कौम अपने इतिहास को भूल जाती है वह अधिक दिनों तक आजाद नहीं रह सकती, सच है। इस देश में दो घटनाएँ इतिहास में घटित हुईं जो हमेशा याद रहेंगी परन्तु दुर्भाग्यवश उन्हें याद नहीं रखा गया, उन पर कोई पुस्तक नहीं लिखी गई तो आने वाली पीढ़ी को कैसे बताया जाए कि सजा-ए-काला पानी तथा जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड क्या था?
इस पुस्तक में 'जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड' का वर्णन है जोकि कुछ भी असत्य नहीं है क्योंकि यह सब कुछ महात्मा गांधी द्वारा लिखे पत्रों, लेखों से लिया गया है। जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल, 1919) ब्रिटिश शासन के क्रूरता का एक काला अध्याय है, जहाँ अमृतसर में निहत्थे भारतीयों की शांतिपूर्ण सभा पर जनरल डायर के आदेश पर अंधाधुध गोलियां चलाई गई, जिससे सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को गहरा धक्का दिया और राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा दी। यह घटना रोलेट एक्ट के प्रति भारतीयों के आक्रोश को भड़का दिया, जिससे असहयोग आंदोलन जैसी राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं हुई और स्वतंत्रता की भावना प्रबल हुई। पुस्तक के पठन से आपको स्वतंत्रता संग्राम में हुए एक बर्बर निर्मम हत्याकांड जलियांवाला बाग, रोलेट एक्ट की पूर्ण जानकारी प्राप्त होगी।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789395813051
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
No. of pages
No. of pages
304
Book Dimension
Book Dimension
22.5 cm x 15 cm x 2.5 cm
Item Weight
Item Weight
610 grams
