Jeevatma Aur Jagat Ke Niyam
Jeevatma Aur Jagat Ke Niyam
Dr. P.K.Sharma
SKU:
कहने को तो आत्मा और जीव, ये दोनों चेतन तत्त्व अलग-अलग दिखाई पड़ते हैं लेकिन आत्मा के चेतन तत्त्व से ही जीव का निर्माण हुआ है। वही चेतन सत्ता जब देह से मुक्त और निराकार अवस्था में होती है तो 'आत्मा' या 'प्राण' (रूह) कहलाई जाती है और जब वह देह में आकर प्रवेश करती है तथा देह धारण करती है तो 'जीव' अथवा 'जीवात्मा' कहलाने लगती है। 'जीव' अथवा 'जीवात्मा' मनुष्य की आत्मा की वह अवस्था है, जिसमें आत्मा-शक्ति शरीर से गहरे रूप से बँध जाती है या शरीर के मोह में, बंधन में जकड़ ली जाती है। यही 'जीव' की 'असहाय अवस्था' या 'दुर्दशा' कहलाती है। ईश्वर या परमात्मा द्वारा बनाए गए नियम जीवात्मा और जगत के संबंध में हैं। अकेली आत्मा या देहविहीन आत्मा न तो कुछ अनुभव कर सकती है और न किसी प्रकार के कायदे-कानून या नियमों को समझ सकती है।
Couldn't load pickup availability
Share
Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392605406
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
No. of pages
No. of pages
168
Book Dimension
Book Dimension
22.5 cm x 15 cm x 1.6 cm
Item Weight
Item Weight
470 grams
