Jiye Kandhar Vol. 2
Jiye Kandhar Vol. 2
Ganesh Prasad Baranval
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इतिहास की जमीन पर 'जिये कांधार' उपन्यास का ताना-बाना बुना गया है। कह सकते हैं इसमें इतिहास एवं कल्पना का संगम होता है, सहायक नदियों की भाँति तर्क तथा भावना, अवधारणा एवं अवधार्य इसमें योगदान करते हैं। ऐतिहासिक श्रोतों-शिलालेख, मुद्रा तथा वांग्मय से जमीन की खोज की गई है। आतंकजीवी शकों को पराभूत करने वाले सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के पुत्र सम्राट कुमारगुप्त तथा इनके पुत्र सम्राट स्कन्दगुप्त इस उपन्यास के नायक हैं। दोनों ने कुल 64 वर्ष तक शासन किया। ये दोनों अपने पूर्ववर्तियों की भाँति निरंकुश होने के साथ उद्बुद्ध निरंकुश (Enlightened Despot) सम्राट हैं अर्थात् इनकी निरंकुशता का इनकी प्रजावत्सलता से बहनापा दीख पड़ता है। यहाँ उल्लेख्य है कि जिस निरंकुश तंत्र को उद्बुद्ध राजतंत्र की मंजिल तक पहुँचने में यूरोप को 18वीं शती तक की यात्रा करनी पड़ी, भारत में उसकी जड़ें अतीत काल में तनाकार हो चुकी थीं, इतिहास बोलता है।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789383276028
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
