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Kahan Aa Gaye
Kahan Aa Gaye
Arvind Gurtu
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एक अजीबो-गरीब बीहड़ स्थान पर सहसा पहुँचकर वे नन्हे सैलानी एकदम भौचक्के हो बोले- "कहाँ आ गए?" यहीं से इस बाल-उपन्यास की कथा का प्रारंभ होता है। वे चारों सैलानी आपस में विचार-विमर्श कर अनेक नक्शे बनाते गए, तरह-तरह के दाँव- पेंच लड़ाते गए और फिर अपने उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए कहाँ से कहाँ पहुँच गए। उन सैलानियों के साथ उनके दो अन्य हमसफर मित्र भी हैं-उनका प्यारा तोता और छोटी गिलहरी। आइए, उन्हीं के साथ हम-आप भी एक दूसरी दुनिया में चलें-उस अलबेली, अजीब और अनोखी दुनिया में जहाँ की हर चीज नई है, निराली है और रोचक है; वह सपनों का संसार, जादू की दुनिया जहाँ की अनमोल खजाना है।
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- HIN- Hindi
ISBN
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9789395960854
Binding
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Hard Cover
Age Group
Age Group
- Kids
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