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Kale Hiran ki Vapsi
Kale Hiran ki Vapsi
Ranjit Singh
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अतीत की यादों के पन्ने खोलना ही तो कहानी होती है। कहानियाँ अतीत की ही होती हैं। कुछेक कहानियाँ बहुत समय पूर्व घटीं या बनी होंगी और कुछेक तो मानो अभी कल की ही बात हो। ‘काले हिरन की वापसी’ की कहानियों में कुछ निकट अतीत की और कुछेक लम्बे अंतराल की हैं। ये सभी कहानियाँ समय-समय पर सुनाई अथवा सुनी गई हैं। ये कहानियाँ पाँच-पाँच छ्ह-छ्ह पृष्ठों में लिखी जा सकती थीं किंतु उनमें किसी प्रकार की मिलावट करना उचित प्रतीत नहीं जाना। इन कहानियों की सादगी अक्षुण्ण रखी गई है। आखिर—‘नानक दुनिया कैसी होइ। सालक मित न रहियो कोइ। बस सब फुल्लां की बागात’।
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Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392731068
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
