Kashmiri Itihas Hindu Panditon Ka Nar Sanhar
Kashmiri Itihas Hindu Panditon Ka Nar Sanhar
Virender Singh
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कश्मीर सन् 1339 ई तक एक हिन्दू राज्य था एवं भारतीय सभ्यता संस्कृति की हिमालय स्थित एक अग्रिम चौकी। यहीं पर पहली बार बौद्ध ग्रन्थों की संस्कृत में रचना हुई। शिव उपासना एवं बौद्ध धर्म का यहाँ अनेकों शताब्दी तक जन-जन में प्रभाव रहा। परन्तु 1413 ई के अन्त तक कश्मीर से हिन्दूओं और हिन्दू धर्म स्थलों के मात्र अवशेष रह गये। शाहमीर वंश के 1373 से 1412 ई तक 40 वर्षों में ही पूर्ण हिन्दू नरसंहार को दो सुल्तानों एवं इस्लामिक धर्मगुरुओं के गठबंधन ने सम्पन्न किया। शेष मुस्लिम शासन काल तो बस पूर्व के स्थापित इस्लामिक चरमपंथी मार्ग पर चलते भर रहे।
जिस कश्मीर की कल्पना अलगाववादी या पाकिस्तानी करते हैं वह मात्र 10 छोटे-छोटे जनपदों का एक भौगोलिक, सामाजिक एवं राजनैतिक समूह है। क्या ऐसे छोटे-छोटे राज्य स्वतंत्र रूप से एक समृद्धशाली राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं, क्या कश्मीर चारों दिशा से विरोधी शक्तिशाली सैन्य शक्तियों से डटकर मुकाबला कर सकता है। इस्लाम और इस्लामिक राष्ट्र सिद्धान्त आज एक असफल और विनाशकारी प्रक्रिया के रूप में विश्व पटल पर दिखायी दे रहा है। आज भी भारत के सामान्य हिन्दू के हृदय में इस्लाम की केवल बर्बर एवं हिंसक तस्वीर अंकित हो वहाँ वह भला कैसे इस्लाम के किसी भी रूप को कैसे सहर्ष स्वीकार कर लेगा। इस पूरे शोध के द्वारा इसी इस्लामिक सामाज्यवाद के सच को सर्वजन के सम्मुख प्रस्तुत करने की कोशिश की गयी है।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392602313
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
