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Kavya Ke Roop
Kavya Ke Roop
Gulab Rai
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बाबू गुलाब राय हिंदी साहित्य के स्वर्णयुग के लेखक थे जो बीसवीं सदी का शुरुआती दौर था। जिन्हें द्विवेदी युग और शुक्ल युग के प्रमुख हिंदी आलोचक के रूप में जाना जाता है। 'काव्य के रूप' सैद्धान्तिक विषयों का प्रतिपादन और विवेचन है। इस पुस्तक में सैद्धान्तिक समीक्षा भी है और व्यावहारिक समीक्षा भी। 'काव्य के रूप' हिन्दी का एक ऐसा ग्रन्थ है जिनमें साहित्य के तत्त्वों की विवेचना के साथ हिन्दी साहित्य के विकास का सम्यक् प्रतिपादन है। साहित्यांगों के तत्त्वों के साथ ही पाठक विशेषतः विद्यार्थी-समुदाय को उदाहरण के रूप में हिन्दी-साहित्य के तत्तत् अंगगत विकास का भी ज्ञान हो जाता है।
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Gulab Rai
