Khair
Khair
R. Pandey
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खैर के वृक्ष जंगलाें में प्राकृतिक रूप से पनपते हैं और प्राकृतिक रूप से फ़लते-फ़ूलते हैं। जब लोगों को पता चला कि खैर एक जंगली वृक्ष होने के साथ-साथ औषधीय गुण भी रखता है तब उन्होंने खैर की लकड़ी से कत्था निकालने का काम शुरू कर दिया।
खैर की सबसे बेशकीमती और महत्वपूर्ण ऊपज कत्था ही है। कत्था पान में लगाया जाता है। मुंह के छालों पर लगाया जाता है। पेट के रोगों में लाभकारी है, खांसी को शांत करता है, मूत्र रोगों का शमन करता है, गुदा को निर्दोष बनाता है आदि ऐसे ही अनेक रोगों में कत्था का सफ़ल प्रयोग पुराने जमाने से होता आ रहा है।
खैर के औषधीय गुणों को देखते हुए देश-विदेश के अधिकांश भागों में खैर की खेती की जा रही है और जहां कहीं भी जंगलों में खैर के वृक्ष प्राकृतिक रूप से फ़ल-फ़ूल रहे हैं, उनके संरक्षण व सुरक्षा पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है। खैर से कत्था बनाने की विधि, कत्थे के गुण और कत्थे का विविध रोगों में औषधीय प्रयोग इस पुस्तक में देने के साथ-साथ खैर की खेती करने के तरीकों के बारे में भी मैंने लिखा है।
इस पुस्तक का अध्ययन करने वाले पाठकों को निःसंदेह रूप से लाभ होगा और वे कत्थे का प्रयोग कर अपने जीवन को सुखमय बना सकेंगे।
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Language
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- HIN- Hindi
ISBN
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9789392690266
Binding
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Hard Cover
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- All Age Groups
- Adults
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