Khel Geet
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एक जमाना था जब कहा जाता था पढ़ोगे -लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे होंगे ख़राब! लेकिन अब समय बदल गया है और खेलों को विशेष महत्त्व दिया जाने लगा है। सभी सरकारें खिलाड़ियों को प्रोत्साहन स्वरूप मोटी रकम और सरकारी नौकरियां प्रदान करने लगी हैं। ऐसे में खेलांे का क्षेत्र गौरवशाली बन गया है। प्रस्तुत पुस्तक में कुछ प्रचलित और पारंपरिक खेलों के विषय में गीतों के माध्यम से जानकारी देने का प्रयास किया गया है। प्रचलित खेलों के अन्तर्गत क्रिक्रेट, कबड्डी, फुटबाल, खो-खो, हाॅकी, कुश्ती, वालीबाल, हैंडबाल, बैडमिंटन और जूडो जैसे खेलो का वर्णन किया गया है। पारम्परिक खेलोें में भी महत्त्वपूर्ण खेल लिए गए हैं जैसे- लुकाछिपी, सी-सा, गिल्ली-डंडा, रस्साकशी, बाजीगर, कंचे, नट, रूमाल झपट्टा, लंगड़ी टांग, पिट्ठू आदि। सुन्दर चित्रों से सुसज्जित यह बड़े आकार, मोटे अक्षरों की सजिल्द पुस्तक है
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