Kya Hai Upnishdon Mein
Kya Hai Upnishdon Mein
Dr. Kiran Kumari
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एक कहावत है, "पोथी की नैया डूबती भी नहीं और पोथी की नैया तारती भी नहीं।" यह अक्षरशः सही है, क्योंकि आप यदि बहुत पढ़ते हैं, जीवन में ज्ञान प्राप्त करना आपका उद्देश्य है तो आपकी नैया कभी नहीं डुबती है। यह ज्ञान हर पल आपका मार्ग-दर्शक बन जाता है यदि आप अपने जीवन में उसका प्रयोग करते हैं, लेकिन यदि आप सर्वप्रथम जब अपने ऊपर उस ज्ञान का प्रयोग नहीं करते हैं तो आपकी नैया आपको तारती नहीं है। इस संदर्भ में हम देखें तो यह कहावत उपनिषदों के लिए पूर्णतः ठीक प्रतीत होती है क्योंकि उपनिषद् सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का ऐसा ज्ञान है जिसे व्यक्ति प्राप्त कर आत्मज्ञान से परमात्मज्ञान की प्राप्ति करता है।
उपनिषद् ही एकमात्र ऐसा ज्ञान-ग्रन्थ है, जो यह प्रमाणित करता है कि पुस्तक में अर्थ नहीं रहता, अर्थ सृष्टि में रहता है। जब यह बात समझ में आ जाएगी तभी सच्चे ज्ञान की पहचान होगी। अतः उपनिषद् वह प्रकाशपुंज है जिसके ज्ञान से आत्मप्रकाश के दीपक से प्रकाशित होते हुए हमें परमात्मा का प्रकाश मिलता हैऔर हम उसके प्रकाश से प्रकाशित होते है।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392680304
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
