Mahan Darshnik Plato
Mahan Darshnik Plato
Babita Sangwan
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अपने जीवन में प्लेटोे ने यूनान के इतिहास का एक अत्यंत नाजुक दौर देखा था। उसने अपनी आँखों से एथेन्स को स्पार्टा के सामने घुटने टेकते हुए देखा था। उसने अपनी आँखों से अपने प्रिय गुरु और अपनी दृष्टि में श्रेष्ठतम मानव सुकरात को विष का प्याला पीते हुए देखा था। उसने एथेन्स में तीस आततायियों का शासन और नैतिक आदर्शों का पराभव देखा था। प्लेटोेे ने इन सार्वजनिक क्षेत्र की बुराइयों को दूर करने का निश्चय किया था। उसे दार्शनिक राजा की धारणा में समस्या का समाधान मिला था। प्लेटोेे का मानना था कि शासन का कार्य एक विशेष कला होने के कारण सर्वाधिक बुद्धिमान व्यक्तियों के द्वारा ही शासन कार्य किया जाना चाहिए। प्लेटोेे के साहित्य से यही आभास होता है कि वह प्रथम सम्भवतः अंतिम व्यक्ति था जिसने इस बात का प्रतिपादन किया कि राज्य पर सर्वाधिक धनवान सर्वाधिक महत्त्वाकांक्षी या सर्वाधिक चालाक व्यक्तियों द्वारा नहीं वरन् सर्वाधिक बुद्धिमान व्यक्तियों द्वारा शासन किया जाना चाहिए। प्लेटोेे के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि राजनीतिक शक्ति और सत्य के प्रेम को एक ही व्यक्ति में कैसे संयुक्त किया जाए। उसकी अकादमी ने एथेन्स के विद्यापीठों में अग्रगण्य स्थान प्राप्त कर लिया था, इस प्रकार वह स्वयं सुकरात का उत्तराधिकारी बन गया था।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
978-93-92681-11-0
Binding
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Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
