Malini Ke Vanon Main
Malini Ke Vanon Main
Shrinidhi Sindhantalankar
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हिन्दी में जंगल साहित्य का अत्यन्त अभाव है। जो जंगल साहित्य उपलब्ध है वह भी स्वस्थ या रोचक नहीं कहा जा सकता। आखेट हमारे उदय और विकास का प्रथम चरण है, पहला अध्याय है। लेखक इस पाठ को वनों की गोद में जीवन-जन्तुओं और पशु-पक्षियों के साथ सीखा था और इस सहकर्म को हम भूल नहीं सकते, आज भी उसका अपना एक विशेष स्थान है। लेखक जब मालिनी के तट पर घूम रहे थे, तब उन्होंने एक महत्त्वपूर्ण स्थान खोज निकाला। वह स्थान था महर्षि कण्व का आश्रम, जिसका वर्णन हमारे प्राचीन ग्रन्थों में मिलता है। लेकिन आज जो वर्तमान साहित्य हमारे सामने है उसमें कहीं भी इसका स्पष्टीकरण नहीं हो पाता। इस अभाव की पूर्ति के लिए लेखक ने कई बार मालिनी के तटों की यात्रा की और सही तथ्य ढूंढकर इस महत्त्वपूर्ण स्थान की घोषणा भी कर दी। यह वही स्थान है जहाँ कण्व-दुहिता का छात्र जीवन व्यतीत हुआ। शाकुन्तल वर्णित मालिनी के इस सौन्दर्य को लेकर महाकवि कालिदास ने भारत का छः सहस्त्र वर्ष पूर्व का इतिहास लिखा था।
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Hard Cover
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Shrinidhi Sindhantalankar
