Marmik Rahssya
Marmik Rahssya
Sharwan Kumar Divya
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किन्हीं लोगों के व्यक्तित्व में कुछ ऐसी बात होती है कि उनको एक नजर देखते ही उनके प्रति अनुराग उमड़ पड़ता है। स्टैफन स्वैग (जिसका उच्चारण हिन्दी में प्रायः स्टीफन ज़्वीग किया जाता है) के व्यक्तित्व में भी कुछ ऐसी ही बात है। आपका उनसे परिचय हुआ नहीं कि आप उनकी साहित्यिक प्रतिभा के कायल हुए नहीं। स्टैफन स्वैग को लेखक के नाते अभूतपूर्व सफलता मिली। स्टैफन स्वैग अपने को हर प्रकार से अपने युग का प्रतीक मानते हैं क्योंकि उन्होंने दोनों विश्व-युद्धों की घोर विभीषिकाएँ, अपनी आँखों देखी और सहीं। और साथ-साथ यह भी जाना कि व्यक्तिगत स्वातंत्र्य की परिसीमा क्या है, और यह भी कि मानव का वैदिक पतन कहाँ तक हो सकता है? उनके अपने शब्दों में-"मुझे अत्यधिक सम्मान मिला, मुझे अत्यधिक घृणा मिली। मैंने पूरी आजादी देखी, मैंने पूरी गुलामी देखी। मैंने अमीरी देखी, मैंने गरीबी देखी।" स्टैफन स्वैग ने जो कुछ कहा है, पूरी ऋजुता से कहा है और अनुवादक ने भी इस ऋजुता को यथा-सामर्थ्य निभाकर 'मार्मिक रहस्य' की रचना की।
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Hard Cover
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Sharwan Kumar Divya
