Mudrasfiti Prabandhan
Mudrasfiti Prabandhan
Dr. Virendra Singh Baghel
SKU:
नब्बे के दशक के पूर्वार्द्ध में आर्थिक सुधारों की शुरुआत के फलस्वरूप त्वरित और तीव्र विकास के युग में भारत के प्रवेश के साथ ही सौभाग्य से उस दुखद अध्याय की इति हो गई। नियंत्रणकारी प्रशासकीय उपायों में शिथिलता का भी इसमें विशेष योगदान रहा। इसके बाद भी मुद्रास्फीति के दौर आते रहे हैं, परंतु इनके पीछे कोई विशेष कारण रहा होता है और नीतिगत परिवर्तनों का असर इन पर शीघ्र पड़ने लगता है। परंतु वर्ष 2008-09 के प्रारंभ से ही मुद्रास्फीति का जो दौर इस बार शुरू हुआ है, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रारंभिक चरण में इसका कारण था, वैश्विक स्तर पर वस्तुओं और जिन्सों के मूल्यों में अचानक आई तेजी, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में भी दबे पाँव घुस आई थी। अब मुद्रास्फीति में जो वृद्धि हो रही थी, वह जिन्सों की महँगाई के कारण हो रही थी। परंतु इस बार का दबाव घरेलू कारणों से आ रहा था।
Couldn't load pickup availability
Share
Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392602474
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
