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Muhavare, Kahavatein aur Lokoktiyan

Muhavare, Kahavatein aur Lokoktiyan

Nathulal Sharma

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मुहावरे और लोकोक्तियाँ मानव जाति के सुदीर्घ अनुभव द्वारा प्रस्तुत होते हैं। इन्हें मानव जाति के अनुभव का विलक्षण सूत्रात्मक कोष कहा जा सकता है।। मुहावरे और लोकोक्तियों का गहन अध्ययन किया जाए तो हम सम्बन्धित समाज को सम्पूर्ण संरचना और संवेदनाओं के स्वरूपगत विकास को जान सकते हैं। मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग भाषा में सजीवता और सरसता का संरचरण कर देता है। इनमें निहित लाक्षणिकता भाषा को सौष्ठ और प्रभावशीलता प्रदान करती है। ये दोनों ही भाषा और साहित्य-सागर के अनमोल रत्न हैं। इनका सटीक और स्वाभाविक प्रयोग-उपयोग जहाँ भी होता है, वहीं एक सहज सौंदर्य की सृष्टि हो जाती है। "मुहावरों तथा लोकोक्तियों के प्रयोग से भाषा-शैली में गतिशीलता और रुचिकरता जाती है और यदा-कदा उसमें चित्रमयता का समावेश हो जाता है।"

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Author

Nathulal Sharma

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