Naari Tere Roop Anek
Naari Tere Roop Anek
Bhagvati Prasad Vajpayee
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‘नारी तेरे रूप अनेक’ एक आदर्शवादी उपन्यास है। इसमें सर्व धर्म समन्वय तथा जनसेवा का संदेश है। कथा त्रिकोणात्मक है। इसमें दो मुख्य नारी पात्र हैं- इरफ़ाना और लक्ष्मी। क्रमश: मुस्लिम और हिन्दू स्त्रियाँ। दो मुख्य पुरुष पात्र हैं- विवेक और गोल्डी। क्र्मश: हिंदू और ईसाई। इनका एक संकल्प है- जनसेवा। ये नारियाँ कुमारी माताओं के ग्रर्भस्थ शिशुओं की रक्षा / चिकित्सा व्यवस्था करती हैं और वृद्धजनों के लिए ‘अपना घर’ की स्थापना करती हैं। ये सोद्देश्य अभियान चलाती हैं- अंतर्जातीय विवाह का और विजातीय शिशुओं को गोद लेने का। वस्तुत मानव-धर्म ही इनका सर्वस्व है। जीवन के यथार्थ का चित्रण करते हुए मानव-सेवा को उद्देश बनाकर इस उपन्यास की रचना की गई इसलिए यह एक आदर्शवादी उपन्यास है। कथा-प्रधान उपन्यास ऐतिहासिक शैली में लिखा गया है।
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Hard Cover
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Bhagvati Prasad Vajpayee
