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Nadi Ka Devta

Nadi Ka Devta

Kaviraj Ratnakar Shastri

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दौड़ते हुए क्षणों को भाषा की परिधि में न बाँधा जाय तो वे रुकेंगे थोड़े ही। स्मृति भी आवस्थिक है। लेख ही उसे स्थायी बनाते हैं। जीवन के अनुभव वेदना भरे हृदय के साथ चले जाएँगे, मन करता है कुछ आपको हलका कर लूँ। प्रत्येक कथा जो मैंने यहाँ कही है, एक घटना ही है। मैंने उसे कथा का रूप दे दिया है। कथाएँ भी व्यथाओं की। अमूर्त करुणा को मूर्ति देना ही इस प्रयास का उद्देश्य है। इनमें कल्पना की उड़ान नहीं जीवन का दर्शन है। यद्यपि ये घटनाएँ यथार्थ में घटीं पर हमारी कल्पनाओं के ऊपर भी कुछ हो रहा है, यह न भूल जाएँ।

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Hard Cover

Author

Kaviraj Ratnakar Shastri

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