Nari Kabhi Na Hari
Nari Kabhi Na Hari
Dr. Pavitra Kumar Sharma
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इस कलियुगी जगत में नारी की जितनी बुरी दशा हो रही है, उतनी किसी भी युग में नहीं हुई। सतयुग और त्रेता आदि दो युगों में भारतीय नारी पूज्य थी। द्वापर युग में, पुरुषों की तरह नारियों में भी अनेक प्रकार की बुराइयाँ आने लगी थीं, लेकिन फिर भी समाज नारी की इज्जत के साथ खुले रूप से खिलवाड़ नहीं किया करता था। आज तो जगह-जगह समाज में नारी की दुर्गति हो रही है, इसलिए समाज भी दुर्गति की हालत में पहुँच चुका है। घर-परिवार को सँभालने वाली नारी ही होती है। नारी के ऊपर सारे समाज का भविष्य टिका हुआ है। समाज के अंदर जो भी व्यक्ति पैदा होता है-उसे नारी ही 'मनुष्य' बनाती है। भारतमाता को स्वतंत्र कराने के लिए यहाँ की नारियों ने भी पुरुषों की तरह अनेक कष्ट झेले, जेल गई तथा क्रूर अंग्रेजों की लाठियाँ सही हैं। अब नारियाँ अपनी लाचारी और मजबूरियों के बंधन तोड़ रही हैं और हिम्मतवान बनकर हमारे देश की शान हैं। नारी प्रेम, दया, साहस, करुणा, परोपकार, त्याग और सेवा की प्रतिमूर्ति हैं। पुस्तक 'नारी कभी न हारी' महिलाओं की स्थिति, उनके संघर्षों और अदम्य साहस को समर्पित एक प्रेरणादाय पुस्तक है। यह पुस्तक पारंपरिक रूढ़ियों का खंडन करती है और इतिहास से लेकर आज तक की हिम्मतवान नारियों की गाथाओं का वर्णन करती है। यह पुस्तक दर्शाती है कि तमाम सामाजिक, पारिवारिक और मानसिक बाधाओं के बावजूद, नारी ने हार नहीं मानी है।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789395861663
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
No. of pages
No. of pages
120
Book Dimension
Book Dimension
22.5 cm x 15 cm x 1.5 cm
Item Weight
Item Weight
380 grams
