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Nayi Subah Ki Or

Nayi Subah Ki Or

Prakash Chandra Pandey

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यह काव्य संकलन कवि के विविध विचारों के मन्थन का एक ऐसा उत्कर्ष है, जिसमें कहीं भारतीय सामाजिक वैचारिकताओं का खन्डन है, तो कहीं पृथ्वी के नैसर्गिक विलक्षण उत्पादों को एक विशिष्ठ काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है। आज के इस मशीनी युग में जहाँ मानव को पल भर के लिये भी अपने आस-पास की असख्य, व्यावहारिक व भौगोलिक अव्यवस्थाओं और दुर्व्यवस्थाओं का किंचित मात्र भी आभास नहीं है कि इनके दूरगामी परिणाम कितने भयावह, विस्फोटक और विनाशकारी हो सकते हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण पिछले दो चार दिनों पूर्व घटित उत्तराखंड की विनाशलीला का कहर है।

यह विनाशलीला मात्र संयोग नहीं है। इसके जिम्मेदार हम स्वंय हैं। प्रकृति के पर्यावरण को छेड़ कर हमने न जाने कितने अनजान आपदाओं को आमन्त्रित कर लिया है। इस काव्य संचालिका में ऐसी ही कई विचारणीय तत्वों को कविता के माध्यम से उजागर करने का प्रयत्न किया गया है।

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Regular price INR. 280
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9788189362409

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults
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