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Netradaan

Netradaan

Sudarshan Vashisth

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वरिष्ठ कथाकार वशिष्ठ का कथा संसार आज भी बहुआयामी और विविधताओं से भरा हुआ है। उतना ही संवेदनशील, उतना ही सृजनशील। बल्कि और ऊर्जावान् हुआ है। अव्यक्त को व्यक्त करना और व्यक्त को अव्यक्त करना, पात्रों को उभार कर रहस्यमय परिस्थितियों में छोड़ देना, इनकी कहानियों की कला है। कम से कम शब्दों में अधिक बात कहना, प्रतीकात्मक ढंग से इंगित करना और कथ्य के अनुरूप वातावरण व भाषा का निर्माण इन की खूबी रही है। "नैनं छिन्दन्ति शस्त्रणि", "हदे निगाह तक", "देवता नहीं है", "वसुधा की डायरी" जैसी अधिकांश कहानियां जबरदस्त कसवाट लिए हुए हैं जो कथा शिल्प का नमूना पेश करती हैं।

"सालिगराम की चिट्ठी" और "नेत्रदान" जैसी कहानियों में व्यंग्य की धार छिपी हुई है। प्रायः कहानियों के अंत सूत्र रूप में खुले छोड़ दिए जाते हैं जो पाठक को सोचने पर विवश करते हैं। जीवन की जटिलताओं को गांठ दर गांठ खोलना, विरोधाभासों को अनजाने में स्पष्ट कर देना, प्रस्तुत कहानियों की विशेषता है। कई दृष्टियों से कहानीकार की यह कथायात्रा एक कालपात्र दुलर्भ दस्तावेज के रूप में स्थापित होती है।

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Regular price INR. 476
Regular price INR. 595 Sale price INR. 476
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392717369

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults
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