Pakistan mein Loktantra
Pakistan mein Loktantra
V.Singh
SKU:
भारत में भी कई अवधारणाओं ने जन्म लिया लोकतन्त्र, संसद और जनप्रतिनिधी। यूरोप में भी पंद्रहवीं सदी से ही लोकतन्त्र की नींव पड़ने लगी थी। वैसे तो प्राचीन भारत के इतिहास में गणतन्त्र मगध, वैशाली आदि राज्यों में प्रतिष्ठित था ही। हमारी पंचायतें भी लोकतंत्र के प्रति लोगों के विश्वास को पुष्ट करती आई हैं। किन्तु पाकिस्तान ! पाकिस्तान जब बना तब बन तो गया मगर तब विभाजन के पूर्व ब्रिटिशों द्वारा बनाए शासन तंत्र के स्केलेटन को वह कोई पुख्ता स्वरूप न दे सका। बस कामचलाऊ संविधान बने जिन्हें कोई भी शासक अपनी मर्जी से तोड़ता-मोड़ता रहा। बस यहीं से शुरू हुआ सिलसिला लोकतंत्र की गले पर चाकू रेतने का। इन्होंने प्रधानमंत्री को उसके मंत्रीमण्डल सहित, केन्द्रीय संसद तथा प्रांतीय विधानसभाओं को भंग कर सारे अधिकार स्वयं ले लिये और पाकिस्तानी राजनीति में सेना की घुसपैठ बढ़ती गई। इस बीच कितने ही प्रधानमंत्री बदले।
1962 में उन्होंने एक संविधान प्रस्तुत किया था उसमें नियंत्रित और निर्देशित लोकतंत्र का मजबूत पक्ष रखा गया था। लेकिन अब तक तो यह परम्परा ही बन चुकी थी कि पाकिस्तान में जो भी सेना का मुखिया होता था वह लोकतांत्रिक तरीकों से चुनी सरकार को बर्खास्त कर सैन्यशासन स्थापित कर लेता था और अंत में कठपुतली बने राष्ट्रपति को हटा स्वयं राष्ट्रपति बन जाता था। पाकिस्तान में इतिहास ने चार बार स्वयं को दोहरा कर इसे परम्परा ही बना दिया है। पाकिस्तान में लोकतंत्र की नींव सदा ही से बेहद कमजोर थी और निरंतर कमजोर हो रही है। लेकिन आश्चर्य कि वहाँ कि जनता इसे कैसे स्वीकार करती चली आई है? या वह मान चुकी है कि लोकतन्त्र पाकिस्तान की किस्मत नहीं।
Couldn't load pickup availability
Share
Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392679346
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
No. of pages
No. of pages
152
Book Dimension
Book Dimension
22.5 cm x 15 cm x 1.5 cm
Item Weight
Item Weight
450 grams
