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Pandit Deendyal Upadhyay

Pandit Deendyal Upadhyay

Dr. Pavitra Kumar Sharma

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दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिंतक, संगठनकर्ता और एकात्म मानवतावाद के प्रणेता के रूप में जाने जाते हैं। वे भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे थे। दीनदयाल जी सरल और सौम्य स्वभाव के व्यक्ति थे।

राजनीति के अलावा साहित्य में भी उनकी गहरी रुचि थी। उनके हिन्दी तथा अंग्रेजी के लेख पांचजन्य तथा राष्ट्रधर्म आदि पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते थे। छात्र-जीवन में उन्होंने मैट्रिक तथा इंटरमीडिएट परीक्षाओं में सर्वाधिक अंक लाकर गोल्ड मैडल प्राप्त किए थे।

वे सिविल सेवा परीक्षा में भी उत्तीर्ण हुए लेकिन सिविल सर्विस का उन्होंने त्याग कर दिया था। इन्होंने ही राष्ट्रधर्म, पांचजन्य तथा स्वदेश जैसी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से जुड़ी पत्र-पत्रिकाएँ प्रकाशित करनी आरंभ की थीं। सन् 1951 ई. मैं जब डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की थी तो दीनदयाल जी को उन्होंने उत्तर प्रदेश का जनसंघ-महासचिव बनाया था। दीनदयाल उपाध्याय जी का उद्देश्य स्वतंत्रता की पुनर्रचना के प्रयासों के लिए विशुद्ध भारतीय तत्त्व दृष्टि प्रदान करना था।

दीनदयाल जी ने 'दो योजनाएँ', 'राजनीतिक डायरी', 'भारतीय अर्थनीति का अवमूल्यन', 'सम्राट चंद्रगुप्त', 'जगद्गुरु शंकराचार्य', 'एकात्म मानववाद', 'राष्ट्रजीवन की दिशा' तथा 'एक प्रेमकथा' आदि पुस्तकों की रचना की थी। 11 फरवरी, 1968 ई. में रात को रेलयात्रा के दौरान मुगलसराय रेलवे स्टेशन के पास किसी ने उनकी हत्या कर दी। इस तरह 52 वर्ष की कम आयु में ही दीनदयाल उपाध्याय जी का निधन हो गया था।

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Regular price INR. 476
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392715143

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults

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