Skip to product information
1 of 1

Parivarik Rishton Mein Mitrata ka Mahatva

Parivarik Rishton Mein Mitrata ka Mahatva

Rajender Pandey

SKU:

कुछ लोगों के बहुत से मित्र होते हैं और कुछ लोगों के पास गिने-चुने ही मित्र होते हैं। ढेर सारे मित्रों की अपेक्षा गिने-चुने सच्चे और ईमानदार मित्र ही व्यक्ति के भले के लिए सही होते हैं। पति-पत्नी, माता-पिता, भाई- बहन, भाई-भाई आदि रिश्तों में यदि मित्रता का भी प्रवेश हो जाए तो मैं दावे के साथ कहता हूँ कि आपस में कोई किसी का शत्रु ही न बने, बदले की भावना लोग मन में न पालें और सभी संबंधों में गंगाजल की तरह बहाव आ जाए और कोई बाधा ही न हो। मानवीय प्रेम और अंतरंगता के रहस्यों को उजागर करने वाली यह पुस्तक हर व्यक्ति के जीवन को समृद्ध तथा प्रभावशाली बनाने में सक्षम साबित होगी। इस पुस्तक में प्यार करने के तरीकों को नये ढंग से जादुई अंदाज में परोसा गया है। संभावनापूर्ण चिंतन तथा सत्यता का अद्भुत संयोग भी है। एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका तथा जीवन- संगिनी भी यह पुस्तक साबित होगी। आप सब जरा पढ़ कर तो देखें।

Quantity
Regular price INR. 476
Regular price INR. 595 Sale price INR. 476
Sale Sold out
Shipping calculated at checkout.

Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789395861731

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults
View full details