Parivarik Rishton Mein Mitrata Ka Mahetav
Parivarik Rishton Mein Mitrata Ka Mahetav
Rajender Pandey
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कुछ लोगों के बहुत से मित्र होते हैं और कुछ लोगों के पास गिने-चुने ही मित्र होते हैं। ढेर सारे मित्रों की अपेक्षा गिने-चुने सच्चे और ईमानदार मित्र ही व्यक्ति के भले के लिए सही होते हैं। पति-पत्नी, माता-पिता, भाई- बहन, भाई-भाई आदि रिश्तों में यदि मित्रता का भी प्रवेश हो जाए तो मैं दावे के साथ कहता हूँ कि आपस में कोई किसी का शत्रु ही न बने, बदले की भावना लोग मन में न पालें और सभी संबंधों में गंगाजल की तरह बहाव आ जाए और कोई बाधा ही न हो। मानवीय प्रेम और अंतरंगता के रहस्यों को उजागर करने वाली यह पुस्तक हर व्यक्ति के जीवन को समृद्ध तथा प्रभावशाली बनाने में सक्षम साबित होगी। इस पुस्तक में प्यार करने के तरीकों को नये ढंग से जादुई अंदाज में परोसा गया है। संभावनापूर्ण चिंतन तथा सत्यता का अद्भुत संयोग भी है। एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका तथा जीवन- संगिनी भी यह पुस्तक साबित होगी। आप सब जरा पढ़ कर तो देखें।
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Binding
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Hard Cover
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Rajender Pandey
