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Paryavaran Prashnottri

Paryavaran Prashnottri

Dr. Mahender Kumar Mishra

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पृथ्वी पर मूलतः दो प्रकार के वातावरण पाये जाते हैं-प्रथम, प्राकृतिक वातावरण तथा द्वितीय, सांस्कृतिक वातावरण। मानव प्राकृतिक वातावरण में भिन्न-भिन्न रूपों में रहता है तथा मानव के विकास, वितरण तथा क्रियाकलापों आदि में प्राकृतिक वातावरण प्रमुख प्रभावकारी कारक है। मानव इन विभिन्न पर्यावरणीय दशाओं में विकसित होकर अपने क्रियाकलापों के लिए अपने को अनुकूलित करता है जिसमें स्थानिक भिन्नता मिलती है। ध्रुवीय प्रदेशों में रहने वाले मानव वर्ग शीत वातावरण के प्रति, मध्य अक्षांशीय क्षेत्रों में रहने वाले खिरगिज शीतोष्ण वातावरण के प्रति तथा विषुवतीय क्षेत्रों में रहने वाले, पिग्मी उष्ण वातावरण के प्रति अनुकूलित रहकर अपनी क्रियाएँ करते हैं। इन सभी अनुकूलन दशाओं तथा स्थानिक भिन्नताओं के आधार पर विभिन्न लक्षणों वाले प्रदेश मिलते हैं जिनमें प्रत्येक प्रदेश, जनसंख्या, संसाधन, आर्थिक क्रियाकलापों, सांस्कृतिक मूल्यों की दृष्टि से समलक्षणिक होते हैं। इन प्रदेशों का पृथक प्रतिरूपों के रूप में अध्ययन मानव भूगोल है। दूसरे शब्दों में पृथ्वी तल पर भिन्न-भिन्न प्रदेशों में रहने वाले मानव वर्गों के क्रियाकलापों तथा जीवन पद्धति का अध्ययन मानव भूगोल कहलाता है।

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Regular price INR. 476
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392684449

Binding

Hard Cover

Age Group

  • All Age Groups

No. of pages

192

Book Dimension

22.5 cm x 15 cm x 1.8 cm

Item Weight

470 grams

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