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Pati Parmeshwar
Pati Parmeshwar
Bhagvati Prasad Vajpayee
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श्री भगवती प्रसाद वाजपेयी के उपन्यास 'पति परमेश्वर' की पाण्डुलिपि पढ़ने का मुझे अवसर मिला है। समाज में नारी की विशेषतः कार्यशील नारी की स्थिति को लेकर हिन्दी के अधिकांश उपन्यास प्रायः महिला लेखिकाओं ने ही लिखे हैं। यह उपन्यास एक पुरुष लेखक का है, फिर भी इसमें नारी की सामाजिक स्थिति को ही नहीं, उसकी मानसिकता को भी बड़ी संवेदना के साथ समझने और अनावृत करने का प्रयास हुआ है। सरकारी तंत्र की रूढ़ कल्पनाहीनता और उसकी विकृत्तियों पर भी प्रसंगतः लेखक ने अपनी गहरी सूझबूझ का परिचय दिया है। इस उपन्यास में पठनीयता का तत्त्व विशेष रूप से उल्लेखनीय है और शैली में एक ऐसी सहजता है जो इसके लोकप्रिय होने के विषय में हमें पूर्णतः आश्वस्त करती है।
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Bhagvati Prasad Vajpayee
