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Patrakarita Ke Mool Mantra

Patrakarita Ke Mool Mantra

Deepak Bishat Shandilaya

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आज नये पत्रकार उपर्युक्त कारणों से पत्रकारिताई दक्षता और भाषा ज्ञान में इतने कमजोर हो गये हैं कि सब कुछ उल्टा सीधा लिखते रहते हैं। रवि को रवी, रवीन्द्र को रविन्द्र, न्यायालय को न्यायलय, अनधिकृत को अनाधिकृत, पुनरुत्थान को पुनरोत्थान, महाराज को महराज, गिरि को गिरी, दंपति को दंपत्ति, और संन्यास को सन्यास लिखा जा रहा है। ऐसे कितने ही अन्य शब्दों को धड़ल्ले से गलत लिखा जा रहा है। लेकिन लेखन की गुणवत्ता में आ रही गिरावट को तो एक दिन थमना ही होगा। खासकर प्रतिस्पर्धा के इस दौर में ऐसा बहुत शीघ्र होने जा रहा है। अतः नये पत्रकारों को अपनी व्यावसायिक प्रतिभा को निखारना ही होगा।

उन्हें जहां से भी ज्ञान मिले, वहां से प्राप्त करना होगा। जिज्ञासु पत्रकारों का मार्गदर्शन करने के लिए यह पुस्तक प्रस्तुत की गयी है। पुस्तक का आद्योपांत गंभीर अध्ययन करने पर पाठकों को उसमें ऐसी जानकारियां अवश्य मिलेंगी, जिनकी बदौलत उनकी लेखनी में चमक आ जाएगी। 

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Regular price INR. 796
Regular price INR. 995 Sale price INR. 796
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392717383

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults
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