Patrakarita Ke Mool Mantra
Patrakarita Ke Mool Mantra
Deepak Bishat Shandilaya
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आज नये पत्रकार उपर्युक्त कारणों से पत्रकारिताई दक्षता और भाषा ज्ञान में इतने कमजोर हो गये हैं कि सब कुछ उल्टा सीधा लिखते रहते हैं। रवि को रवी, रवीन्द्र को रविन्द्र, न्यायालय को न्यायलय, अनधिकृत को अनाधिकृत, पुनरुत्थान को पुनरोत्थान, महाराज को महराज, गिरि को गिरी, दंपति को दंपत्ति, और संन्यास को सन्यास लिखा जा रहा है। ऐसे कितने ही अन्य शब्दों को धड़ल्ले से गलत लिखा जा रहा है। लेकिन लेखन की गुणवत्ता में आ रही गिरावट को तो एक दिन थमना ही होगा। खासकर प्रतिस्पर्धा के इस दौर में ऐसा बहुत शीघ्र होने जा रहा है। अतः नये पत्रकारों को अपनी व्यावसायिक प्रतिभा को निखारना ही होगा।
उन्हें जहां से भी ज्ञान मिले, वहां से प्राप्त करना होगा। जिज्ञासु पत्रकारों का मार्गदर्शन करने के लिए यह पुस्तक प्रस्तुत की गयी है। पुस्तक का आद्योपांत गंभीर अध्ययन करने पर पाठकों को उसमें ऐसी जानकारियां अवश्य मिलेंगी, जिनकी बदौलत उनकी लेखनी में चमक आ जाएगी।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392717383
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
