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Pavak

Pavak

Dr. Bhagwati Saran Mishra

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यह पुस्तक लेखक के 20 वर्षों के श्रम का प्रतिफल है। आचार्यों की श्रृंखला के अंतिम आचार्य श्रीमद्वल्लभाचार्य के जीवन को आधार बनाकर प्रस्तुत यह उपन्यास उनकी अद्भुत जीवन-गाथा का एक प्रामाणिक दस्तावेज तो है ही, इसके अतिरिक्त भी यह बहुत कुछ है। बल्लभाचार्य एक अवतारी पुरुष थे। हिंदी वाले उन्हें कम ही जानते हैं पर इतना वे अवश्य जानते हैं कि वे हिंदी के सर्वश्रेष्ठ कवि सूरदास के गुरु थे। इस पुस्तक को पढ़ने से ज्ञात होगा कि श्रीमद्वल्लभाचार्य नहीं होते तो सूरदास भी नहीं होते और न होता उनका ‘सूर सागर’। वल्लभाचार्य, आचार्यों की परम्परा के अंतिम आचार्य थे। आदि शंकराचार्य, मध्वाचार्य,निम्बर्काचार्य और रामानुजाचार्य के सदृश आचार्यों के मध्य वह एक देदीप्यमान नक्षत्र की तरह शोभित हैं। कृष्ण-भक्ति के तो वे एकमात्र आचार्य हैं। कृष्ण-भक्ति का ऐसा आचार्य न उनके पूर्व हुआ न आगे उसके होने की सम्भावना है। इस पुस्तक को दो खंडों में प्रस्तुत किया जा रहा है- ‘पावक’ और ‘अग्निपुरुष’। दोनों खंड स्वतंत्र हैं। दिव्तीय खंड को इस तरह लिखा गया है कि इसे पढ़ते समय प्रथम खंड के नहीं पढ़ने से किसी असुविधा का भान नहीं हो। इस उपन्यास का अध्ययन कर कोई भी भारतीय अपनी उदात्त संस्कृति और परम्परा से परिचित हो सकता है।

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Binding

Hard Cover

Author

Dr. Bhagwati Saran Mishra

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