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Pema

Pema

S.Saki

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पेमां खड़ी होकर बंद खिड़की के शीशे से बस पकड़ने के लिए सड़क की तरफ जा रहे सागर की पीठ की ओर देख रही थी। पेमां को लग रहा था जैसे वह सागर नहीं बल्कि वह भी अपने पिता की तरह एक तारा था जो उसकी जिंदगी से टूटकर और मन के दरवाज़े से बाहर निकलकर खुले आकाश पर चमकने के लिए अकेला चला जा रहा था।

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Regular price INR. 556
Regular price INR. 695 Sale price INR. 556
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Hard Cover

Author

S.Saki

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