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Phansi Se Poorv

Phansi Se Poorv

Bachchan Singh

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राम प्रसाद बिस्मिल अपने समकालीन कांतिकारियों में शिखर पर थे। उन्होंने देश की बलिवेदी पर सिर्फ खुद को ही होम नहीं किया, अपने माता-पिता के सुख और उनकी आकांक्षों को भी राख में बदल दिया। उनका निजी जीवन विश्वासघातों का पुलिंदा बन गया था। जिस पर उन्होंने विश्वास किया उसी के हाथों छले गए। जब वे फांसी के फंदे के नजदीक थे तब उनका परिवार फांकाकशी कर रहा था जबकि उनके कई हजार रुपए उन लोगों के पास थे जिन्हें वे बेहद आत्मीय मानते थे। बिस्मिल के गिरफ्तार होते ही सभी की नीयत खराब हो गई।

सभी ने चेहरे बदल लिए। इस दर्दनाक सचाई से बिस्मिल आहत तो थे लेकिन टूटे नहीं। अंत तक अविचलित और दृढ़ रहे। यह उपन्यास बिस्मिल के जीवन में आए खौफनाक उतार-चढ़ावों और घात-प्रतिघातों को परत-दर-परत खोलता है और उनके विचार-तरंगों के सूक्ष्म से सूक्ष्म रेशे को पकड़ने की कोशिश करता है। विश्वास है कि यह उपन्यास अपने पाठकों को प्रेरणा देने में कामयाब होगा।

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Regular price INR. 995
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9788119052356

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults
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