Pipal
Pipal
R. Pandey
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भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि वृक्षों में पीपल का वृक्ष मैं स्वयं हूं, अर्थात् उन्होंने पीपल को वृक्षों में सबसे श्रेष्ठ माना है। पीपल को देवताओं का निवास स्थान बताया गया है। भगवान बुद्ध को ज्ञान की अनुभूति पीपल वृक्ष के नीचे ही बैठकर हुई थी।
पीपल सदियों से पूजा जाता रहा है और पीपल ही एक ऐसा वृक्ष है जो दिन-रात प्राणवायु (ऑक्सीजन) छोड़ता रहता है, जिसका लाभ समस्त प्राणियों को होता है। पीपल एक औषधीय गुणों से सम्पन्न वृक्ष भी है। इसकी जड़ से लेकर फल, फूल, पत्ते, छाल, तना यानी सब कुछ ही विविध रोगों का नाश करते हैं।
पीपल के पत्तों का स्वरस पीने मात्र से ही पीलिया जैसे रोग से मुक्ति मात्र हफ्ते भर के भीतर ही हो जाती है। पीपल से बाल-वृद्ध सभी परिचित हैं और इसका वृक्ष देश के हर प्रांत में आसानी से उपलब्ध है। पीपल एक लम्बी उम्र वाला पेड़ है और इसकी जटा तक भी औषधीय गुण रखती है।
नवग्रहों की शांति के लिए पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा की जाती है, उसकी लकड़ी हवन की सामग्री में इस्तेमाल की जाती है। पीपल वृक्ष की जड़ में जल देने से सारे पाप धुल जाते हैं, ऐसा शास्त्रों में लिखा है। इस पुस्तक में पीपल के अनेक औषधीय प्रयोग दिए गए हैं, उम्मीद है आप इनसे लाभान्वित होंगे।
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Language
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- HIN- Hindi
ISBN
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9789392679353
Binding
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Hard Cover
Age Group
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- All Age Groups
- Adults
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