Prathmik Sahayata
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भारत का स्वास्थ्य मंत्रालय तथा अन्य समाजसेवी संस्थाएँ प्रति वर्ष करोड़ों रुपये भारत की जनता के स्वास्थ्य-रक्षा हेतु व्यय करते हैं, पिफर भी बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें डाक्टरी सहायता नहीं मिल पाती । ऐसी अवस्था में दुर्घटना या मामूली रोगों से बचने के लिए जानकारी होना प्रत्येक व्यक्ति का परम कत्र्तव्य हो जाता है। यह जानकारी प्रथमिक सहायता की पुस्तकों को पढ़कर तथा प्रशिक्षण इत्यादि प्राप्त करके ही मिल सकती है। कितने ही व्यक्ति घायलों की मदद तो करना चाहते हैं परन्तु वे मदद करने में असमर्थ हैं, क्योंकि उन्हे प्राथमिक सहायता का ज्ञान नहीं। इस पुस्तक को लिखने का उद्देश्य यही है कि भारत का हर नागरिक आकस्मिक दुर्घटना अथवा आपात्कालीन स्थिति में अपनी मदद स्वयं कर सके। यदि चोट लगने पर खून बहने लगे, हड्डी टूट जाए, साँप, बिच्छू या ततैया काट ले, तो डाक्टर के पहुँचने से पहले हमें क्या करना चाहिए ताकि रोगी की अवस्था भयंकर न हो जाए? यह सब भी इस पुस्तक में मिलेगा। पुस्तक में संक्रांमक रोगों पर काबू पाने के सपफल तरीके भी बताए गए हैं। विभिन्न रोगों के सम्बंध् में आवश्यक सावधनी किस प्रकार रखें, इस विषय पर भी इस पुस्तक में विस्तार से लिखा गया है। पुस्तक की भाषा यथासम्भव सरल रखने का यत्न किया गया है।
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