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Prayashchit

Prayashchit

Kaviraj Ratnakar Shastri

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भारतीय शैली में कहानी से जीवन के किसी पहलू की व्याख्या होनी चाहिए। आत्म-कल्याण की दिशा में प्रगति हो। कहानी भी शिक्षा का अंग है। हिन्दी में चौरासी सन्तों की वार्ता, भक्त-माल, देवासुर संग्राम, प्रेमचन्द की गोदान, गबन, प्रेमाश्रम जैसी कहानियों पर ही कथा साहित्य जीवित है। वही रह जाएगा जो मानव कल्याण से पूर्ण है। विदेशियों की नकल में जो कुछ निरुद्देश्य लिखा जाएगा, रहने वाला नहीं है। मैंने इस पुस्तक में छोटी-छोटी कहानियाँ कही हैं। परन्तु वे घटनाएँ यथार्थ घटीं। याद करके हृदय भारी हो जाता है। उन्हें कहानी का रूप दिए बिना आपको कैसे सुना पाता? हमारी कल्पनाओं के ऊपर भी कुछ हो रहा है, यह न भूल जाएँ।

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Hard Cover

Author

Kaviraj Ratnakar Shastri

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