Rashtra Samvedna
Rashtra Samvedna
SKU:
लोग कहते हैं, हिन्दुस्तान को उसकी संस्कृति ने बचाया। मुस्लिम और अंग्रेजी साम्राज्य के बाद भी हम स्वर्णकाल को तरसते रहे। जब-जब पीढ़ी भटकी, जगह-जगह पर साधु-सन्तों के प्रवचन वेद व पुराणों के उद्धरण सामने लाए गए। सीधी भाषा किसी की समझ में नहीं आई। घर-परिवार समाज से नैतिकता का पतन होता चला गया। रिश्तों की कसक समाप्त होने लगी। माँ-बाप बच्चों पर बोझ होने लगे। कोई नहीं जान पाया कि हम कहाँ पहुँच गए। इस पुस्तक के माध्यम से जीवन के सामान्य मापदंडों को झकझोरने का प्रयास किया है। देश व समाज की आँखों पर बँधी हुई धृतराष्ट्र की पट्टियों को हटाने का प्रयास किया है ताकि कभी आँख खुले तो देख सके कि हमने क्या खोया और क्या पाया। पुस्तिका को रुचिकर बनाने के लिए मन संवेदना को पृथक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
देश, समाज और परिवारों को समर्पित-संवेदना ।
- मदन पाण्डेय 'शिखर'
Couldn't load pickup availability
Share
Binding
Binding
Author
Author
