Rashtriya Garv : Bhartiya Vayusena
Rashtriya Garv : Bhartiya Vayusena
Rampal Singh
SKU:
ब्रिटिश भारत में भारतीय वायुसेना का एक छोटा-सा संगठन था। भारत विभाजन से पूर्व वायुसेना एवं नौसेना की कमांड, आर्मी कमांडर-इन-चीफ के हाथ में थी क्योंकि ये दोनों संगठन बहुत ही छोटे थे। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद भारतीयों को भारतीय सेना में कमीशन मिलना शुरू हुआ अर्थात् प्रथम विश्वयुद्ध से पहले भारतीय सेना में कोई भी भारतीय अधिकारी नहीं था, सभी अधिकारी ब्रिटिश थे। लेकिन प्रथम बैच में 6 भारतीयों को चयनित कर रॉयल एयरफोर्स (RAF) के लिए सन 1930 में ट्रेनिंग करने हेतु रॉयल एयरफोर्स कॉलेज क्रॉनवेल (इंग्लैंड) भेजा गया। उन्हें 8 अक्टूबर, 1932 को किंग्स कमीशन प्राप्त हुआ। यहीं से भारतीय वायुसेना का जन्म हुआ। 1 अप्रैल, सन् 1933 को कराची में भारतीय वायुसेना की प्रथम यूनिट 'ए' फ्लाइट नंबर 1 स्क्वाड्रन का आधिकारिक रूप से निर्माण हुआ।
भारतीयों का चयन भारतीय वायुसेना में बहुत ही कम रहा। सन् 1939 तक नौ और नए अधिकारी (भारतीय), जिनमें एयरचीफ मार्शल अर्जुनसिंह भी थे, चयनित किए गए। भारतीय वायुसेना तकनीकी अधिकारी कराची में ट्रेनिंग लेते थे। 'ए' फ्लाइट के पास चार वापिति (WAPITI) एयरक्राफ्ट थे। इनकी रफ्तार 85 मील प्रतिघंटा थी। भारतीय अधिकारियों को रॉयल एयरफोर्स के कमांडर के तहत सन् 1937 में उत्तरी-पश्चिमी सीमांत प्रदेश में कबाइलियों के विरुद्ध भारतीय सेना के साथ आपरेशन में काम करने का अवसर मिला। उस दिन से आज तक भारतीय वायुसेना का विकास होता चला गया। द्वितीय विश्वयुद्ध में भाग लेकर भारतीय वायुसेना ने जो प्रदर्शन किया वह प्रशंसनीय था। देश की आजादी के बाद भारतीय वायुसेना ने जो भी आपरेशन किया, उनका इस पुस्तक में विस्तृत वर्णन किया गया है।
Couldn't load pickup availability
Share
Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392681417
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
No. of pages
No. of pages
272
Book Dimension
Book Dimension
22.5 cm x 15 cm x 1.9 cm
Item Weight
Item Weight
510 grams
