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Rashtriya Surksha Ke Masle

Rashtriya Surksha Ke Masle

Vibhooti Narayan Rai

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हिंदी के प्रतिष्ठित उपन्यासकार विभूति नारायण राय की रचनात्मकता के दो छोर हैं सृजन और विचार। विचार का विचारधारा से कोई विरोध नहीं है। बल्कि यह कहना ज्यादा तर्कसंगत होगा कि भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहते हुए उन्हें जो अनुभव प्राप्त हुए, उनके साथ विचारधारा ने उनकी सृजनात्मकता को धार दी है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण उनका दूसरा लघु उपन्यास 'शहर में कर्फ्यू' है जिसका लगभग सभी भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ है और सभी में मिलाकर अबतक पचास से अधिक संस्करण छप चुके हैं। मेरे जानते राय अकेले आइपीएस अधिकारी हैं जिन्होंने सेवा में रहते हुए भी पुलिस के जनविरोधी और साम्प्रदायिक चरित्र को समय-समय पर उजागर किया है।

राष्ट्रीय पुलिस एकेडमी हैदराबाद द्वारा दिए गये एक फैलोशिप के अंतर्गत साम्प्रदायिक दंगे और भारतीय पुलिस पर शोध करके उन्होंने प्रमाणित किया कि दंगे के दौरान भारतीय पुलिस की भूमिका न केवल संदिग्ध होती है बल्कि अल्पसंख्यकों के प्रति शत्रुतापूर्ण भी। कहना न होगा कि बाद के लेखन और विचार में भी, खासकर सद्यः प्रकाशित अपनी नई पुस्तक हाशिमपुरा 22 मई से भी उनके पूर्व निष्कर्ष की पुष्टि ही होती है। उनके लिए हमारे जीवन और समाज का सबसे बड़ा मूल्य मनुष्यता है, जिसकी रक्षा के लिए वे हमेशा सचेष्ट रहे हैं। उनके अबतक पाँच उपन्यास और कई गद्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित स्तंभ और स्फुट लेखों से वे निरंतर अपनी संवेदनशीलता से पाठकों को झकझोरते हैं। विभूति नारायण राय के पास एक अदभुत गद्य है जिसकी बानगी प्रस्तुत संग्रह में संकलित लेखों में भी दिखेगी साथ ही उनकी वैचारिक स्फुर्लिंग पाठकों को आकृष्ट करेगी ऐसा मेरा विश्वास है।

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Hard Cover

Author

Vibhooti Narayan Rai

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