Ravindernath Tagore ki 21 Kahaniyan
Ravindernath Tagore ki 21 Kahaniyan
Uma Pathak
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'उसके दादा ने जिस ताँत पर अपना जीवन बुनकर भाई को दान किया था, रसिक की इच्छा थी कि वह उसी ताँत पर अपना जीवन बलि कर दे, पर हाय, वह तो रुपये के लिए पहले ही कलकत्ते में अपना जीवन बलि चढ़ा आया था।' - पणरक्षा
'गुरुदयाल ने आकर माँ बच्चे को भगा दिया। वह भूख से बेचैन, खाली पेट बच्चा वैद्यनाथ का एकमात्र पुत्र था। सौ तंदरुस्त ब्राह्मण और तीन बलिष्ठ संन्यासी वैद्यनाथ को पुत्र-प्राप्ति की झूठी आशा से लुभाकर उनका अन्न खा रहे थे। - पुत्र-यज्ञ
'हमने खद्दर पहन-पहन कर वर्ण भेद को मिटाकर सफेद रंग फैला दिया है, पोशाक का अंतर मिटाकर वर्ण की खाल उतारकर अलग रख दी है।'xx' कपड़ों से वर्ण भेद ढकना ऊपरी है, वह मिटाना नहीं है।' - संस्कार
'तुम मेरी बात नहीं समझोगे। हमारे पैदा होने पर ही सच्चा साथी तय हो जाता है। उसका पता नक्षत्रों के प्रमाण से चलता है।' मैं बोला, 'प्यार सब दुखों और बुरे नक्षत्रों से बड़ा होता है। क्या हमारा जीवन इसी का प्रमाण नहीं है?' - चुराया हुआ धन
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392684463
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
