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Ravinderanath Tagore Ki Sampuran Kahaniyan

Ravinderanath Tagore Ki Sampuran Kahaniyan

Uma Pathak

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कुछ प्रतिभाएँ देशकाल की सीमा से मुक्त होती हैं, रवीन्द्रनाथ टैगोर उन्हीं में से हैं। बँगला साहित्य से जुड़े होने पर भी न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी वे सर्व परिचित हैं। बँगला साहित्य की प्रत्येक विधा को उनका अपूर्व योगदान प्राप्त हुआ, किन्तु सच कहा जाए तो बंगला में छोटी कहानी की रचना सबसे पहले उन्होंने ही की थी। बंकिमचन्द्र ने दो एक कहानियाँ भले ही लिखी हों, पर इस ओर उनकी विशेष रुचि नहीं थी। रवीन्द्रनाथ के कवि हृदय अद्भुत सहानुभूति और अन्तर्दृष्टि से मानव मन की गहराइयों में छिपी भावनाओं को निकालकर अपने भावों और कल्पना के रूप, रंग और रस से सजा सँवारकर सामने ला दिया। यही कारण है कि उनकी कहानियों को कविता का गद्यरूप कहा जा सकता है।

टैगोर की कहानियों में मनुष्य और घटनाओं का प्रकृति के साथ जो घनिष्ठ सम्बन्ध दिखाया गया है वह उसे गीतिकाव्य का सा रूप दे देता है। अनुवाद में सहजता, स्वाभिकता तथा प्रवाह लाने के लिए कई बार शब्द ज्यों के त्यों देना ज़रूरी हो जाता है। अनुवाद की विशेषता यह होती है कि पाठक उस प्रदेश विशेष की प्रथाओं, लोक प्रचलित बातों आदि से परिचित होता है। उसे इस संकलन में लाने की चेष्टा की गई है। इनकी कुछ कहानियों पर फिल्में भी बन चुकी हैं। हिन्दी पाठकों का इनसे परिचय कराना हमारा उद्देश्य है। संकलन दो खण्डो में है।

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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392747304

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults
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