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Rin Pitron ka
Rin Pitron ka
Dilip Kaur Tiwana
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"बहू के लिए मैं अपने पोते को घर से निकाल दूँ? बहू के लिए बिक्रम बेसहारा ही फिरता रहे? हमारे घर श्राद्ध करने वाला और पितरों को पानी देनेवाला कोई न हो? उसे ज्यादा तकलीफ है तो हम इसे चंडीगढ़ ले जाएँगे," सरदार ने गुस्से में कहा। हमारे शास्त्रों में एक 'पितर ऋण' का जिक्र है उसका यही मतलब है कि जो कर्ज हमारे पूर्वज हमें जन्म देकर हमारे सिर चढ़ा गए हैं, पूर्वजों के वंश को आगे बढ़ाकर उसे हमें उतारना है। नहीं तो वह कहते हैं कि श्राद्धों में पूर्वजों को पानी कौन पिलाएगा? उनके नाम की रोटी कौन खिलाएगा और वह अपने घर से भूखे-प्यासे ही लौट जाएँगे।
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Dilip Kaur Tiwana
