Safed Gulab
Safed Gulab
Ranjit Singh
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सफेद गुलाब ऐसे इन्सानी रिश्तों की कहानी है जिनकी पहचान किसी खास हादसे या गुमशुदा या कुछ भूली-बिसरी यादों से वास्ता रखती है। यहाँ असाधारण व्यक्ति को साधारण स्तर पर उतारकर सम्प्रेषित किया गया है। सफेद गुलाब कहानी को ही देखिये। एक स्त्री अपने बेटे को मिलने जाती टैक्सी में बैठी शायद पता दुबारा पड़ने के लिये अपनी डायरी को खोलती है। सामने शीशे में से नौजवान ड्राइवर डायरी में पड़े एक सूखे फूल को देख कर कहता है" ऐसा ही एक फूल उसकी माँ भी अपनी पाठ पुस्तक में रखा करती थी।" "थी" और एक मार्मिक कहानी लिखी जाती है।
रणजीत कोई साधारण घटना या बात या वस्तु को साधारण से साधारण लब-लहजे में संप्रेषित कर पाठक के मन में एक गुदगुदी होने का अहसास जगा देते हैं। यह कर्म शब्द-सृजन का परम धर्म है, उद्देश्य है। रणजीत की कहानियों के 'प्लाट्स' जीवन के चारों पुरषार्थों (अर्थ-धर्म-काम-मोक्ष) से वस्तुपरक रिश्ते रखते लगते हैं- किसी से कम तो किसी से ज्यादा। उसकी दिशा एकदम साफ है। शिल्प-सम्प्रेषण में कतई सादगी है। पंजाबी उर्दू के साथ अंग्रेजी का मिला-जुला रंग-रोमांस लिए सहज हिन्दुस्तानी भाषा है और यहाँ सोच-समझ की वह गहराई है जो किसी लोकप्रिय होने वाली रचना की गहरी मजबूत नींव होने की लाजिमी शर्त होती है।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392733512
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
