Sainya Manobal
Sainya Manobal
V.S.Baghel
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मनोबल का अर्थ है-मन का बल या मानसिक बल। एक शारीरिक बल होता है, दूसरा मानसिक बल होता है। शारीरिक बल की सीमा होती है, लेकिन मानसिक बल की कोई सीमा नहीं होती, इसीलिए इसे मनोबल कहा जाता है। जिस प्रकार मन असीमित होता है, अनंत दिशाओं की यात्रा करता है, उसी प्रकार मानसिक बल को किसी सीमा में बांधा नहीं जा सकता। मन से पहले विचार पैदा होता है और विचार से संपूर्ण जीवन प्रभावित होता है। विचार और मन एक साथ ही मनुष्य की कार्यशैली को प्रभावित करते हैं। जैसा मन, वैसा विचार और ठीक उसी प्रकार मनुष्य का चरित्र। कहते हैं-मन अनंत दिशाओं में घूमता रहता है।
एक क्षण में यहाँ, दूसरे क्षण में हजारों मील दूर। ऐसा इसलिए, क्योंकि मन भाव है, पदार्थ नहीं है। पदार्थ गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होता है। भाव पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसीलिए विज्ञान भी मानता है कि विचार एक सेकंड में पृथ्वी की तीन परिक्रमा कर सकता है। प्राचीनकाल में हमारे संत अपने मनोबल और विचार के द्वारा अंतरिक्ष की यात्रा करते थे। आज तो विज्ञान दूसरे ग्रहों पर अपना अंतरिक्षयान भेजकर दूरी नापता है, लेकिन हजारों वर्ष पूर्व हमारे ऋषियों व संतों ने पृथ्वी से ग्रहों की दूरी की चर्चा पुराणों में कर दी थी। इसलिए मन और विचार भाव रूप में हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व को प्रभावित करते हैं।
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Language
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- HIN- Hindi
ISBN
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9789392731075
Binding
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Hard Cover
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- Adults
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