Saki ki Shreshth Ikayavan Kahaniyan
Saki ki Shreshth Ikayavan Kahaniyan
S.Saki
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साकी की कहानियाँ समाज में रहने वाले पात्रों को लेकर आगे बढ़ती हैं। इसलिए उनकी कहानी पढ़कर लगता है वह पात्र मैं हूँ, आप हैं या समाज में रहने वाले सभी लोग हैं और यह भी लगता है यह कहानियाँ मेरे, आपके और समाज में रहने वाले लोगों के साथ घटी हैं। इनमें यदि कुछ विषय स्त्री-प्रधान हैं तो कुछ पुरुष-प्रधान भी हैं। साकी ने यदि कहानी 'रखैल' में औरत को सहानुभूति का पात्र दिखाया है तो 'छोटासिंह' में पात्र छोटासिंह को पीड़ा की अन्तिम सीमा तक पहुँचा दिया है। साकी की कुछ कहानियाँ यदि बहुत गहराई लिए होती हैं तो कुछ हल्की-फुल्की भी हैं। यदि साकी की कहानी 'फिर नरक' पढ़कर मन बोझिल हो जाता है तो उसकी लिखी कहानी 'दूध और पानी' पढ़कर अपने आपमें मुस्कराने का भी मन करता है। दरअसल साकी अपने ही ढंग का लेखक है। जब भी वह कोई बोझिल या हल्की कहानी लिखता है तो जैसे वह अपने पात्रों के साथ आत्मसात हो जाता है। आशा है कि आप सभी पाठक भी कुछ ऐसा ही अनुभव करेंगे।
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Hard Cover
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S.Saki
