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Saman Saugat Ban Jaye
Saman Saugat Ban Jaye
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इस संकलन की कवितायें जीवन के हर्ष, विषाद, राग, द्वेष, देह, मन, लौकिक, अलौकिक, दार्शनिक, सामाजिक सभी पक्षों से जुड़ी हैं। अनायास ही कलम की नोंक पर आकर कागज पर उतरी हैं। संवेदना के प्रति आग्रहशीलता इन सभी कविताओं में है, क्योंकि लेखक का मानना है कि संवेदनशील मन से ही सच्ची कविता निःसृत होती है। चूँकि ये कवितायें हृदय से निकली हैं इसलिए आस्वादकों के हृदय तक सीधे पहुंचेंगी, ऐसा विश्वास है।
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