Sanskriti ke Do Phool
Sanskriti ke Do Phool
Dr. Vanshidhar Tiwari
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प्रस्तुत कृति 'संस्कृति के दो फूल' आंतरिक समस्याओं के उद्भेदन सह-उच्छेदन उपस्थापित करती है। एक कारखाना मालिक द्वारा मजदूरों का शोषण मुख्य मुद्दा है। माँग माँगने पर यूनियन के नेता की प्रबंधन द्वारा षड्यंत्र कर हत्या करा दी जाती है। उस नेता की इकलौती पुत्री पढ़-लिखकर मजदूर कमिश्नर बन जाती है। कारखाना मालिक का लड़का मैनेजमेंट का कोर्स कर विदेश से लौटता है। मजदूर कमिश्नर द्वारा कारखाने का सुधार होता है। हत्या के जुर्म में मैनेजर व मालिक को कारावास की सजा हो जाती है। इस बीच मालिक ओंकारनाथ अपनी ही भगिनी द्वारा कैसे प्रताड़ित होते हैं। दुर्दिन के शिकार हो जाते हैं। मजदूर की बेटी कल्याणी को भी कई सामाजिक प्रताड़नाएँ झेलनी पड़ती हैं। अंततः दूध का दूध और पानी का पानी न्याय हो पाता है। नायक उपकार और नायिका कल्याणी का उज्ज्वल चरित्र समाज के लिए आदर्श और अनुकरणीय होता है। समाज इन्हें 'संस्कृति के दो फूल' की उपाधि से नवाजता एवं सम्मानित करता है।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392719363
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
