Sant Shiromani Mahakavi Goswami Tulsidas
Sant Shiromani Mahakavi Goswami Tulsidas
Vanshidhar Chaturvedi
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तुलसीदास की माता का नाम हुलसी था और पिता का नाम आत्माराम था। तुलसी की पत्नी का नाम रत्नावली था और तुलसी के श्वसुर दीनबंधु पाठक थे। सच बात तो यह है कि तुलसीदास हिंदी के सर्वोच्च शिखर हो सके क्योंकि उन्होंने अपने समय की विषमताओं और संत्रासों को गहराई से अनुभव किया जो उस समय देश का समाज भोग रहा था, इसीलिए तत्कालीन समाज को नई दिशा मिल सकी। गोस्वामी तुलसीदास ने धर्म और साहित्य द्वारा लोगों की आत्मिक शुद्धि की। यदि तुलसीदास उस समय हिंदुस्तान में न होते तो हिंदुओं की कायिक सुन्नत न सही पर मानसिक और आध्यात्मिक सुन्नत तो अवश्य हो जाती। गोस्वामी तुलसीदास ने धर्म और साहित्य द्वारा लोगों की आत्मिक शुद्धि की। बस इसी सत्य और तथ्य पर ध्यान दिया जाना चाहिए। कहा जाता है कि वाल्मीकि ने ही तुलसी के रूप में अवतार लिया और लोक भाषा में मानस की रचना की। कवि कुटिल और विस्तार हित वाल्मीकि तुलसी भये। तुलसीदास के संबंध मे बहुत-सी सामग्री मिली परंतु यदि उनका पूरा उपयोग किया जाता तो इस उपन्यास का आकार बहुत बड़ा हो जाता इसलिए तुलसी संबंधी घटनाक्रम को संक्षेप में ही लेकर उपयोग करना ठीक लगा। गोस्वामी तुलसीदास लोकोत्तर विभूति थे। उनके विषय में कुछ लिखना सूर्य को दीपक दिखाने जैसा है। फिर भी अपनी तुलसी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यह छोटा-सा प्रयास किया गया है और तथ्यों को यथावत् बनाए रखते हुए प्रस्तुतिकरण में कल्पना का सहारा अवश्य लिया है, जिसकी भाषा शैली अत्यंत ही मधुर और सरल है। आशा है यह प्रयास पाठको के ज्ञान में भी वृद्धि करेगा।
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Vanshidhar Chaturvedi
