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Saral Gita Rahasy

Saral Gita Rahasy

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प्रस्तुत लघु पुस्तक में कम पढ़े-लिखे आबाल-वृद्ध मनुष्यों के लिए अत्यंत सरल भाषा में 'गीता' के सार-तत्त्व को देने का अकिंचन प्रयास किया गया है। कतिपय विद्वानों का कहना है कि पूरी 'गीता' में सात श्लोक ऐसे हैं, जो पूरी गीता के सार-तत्व को प्रकट करते हैं। वे सात श्लोक, अध्याय आठ का 'नवाँ' और 'तेरहवाँ' श्लोक, अध्याय ग्यारह का 'छत्तीसवाँ' श्लोक, अध्याय तेरह का 'तेरहवाँ' श्लोक, अध्याय पन्द्रह का 'पहला' और 'पन्द्रहवाँ' श्लोक तथा अध्याय अट्ठारह का पैंसठवाँ श्लोक हैं। परन्तु इनके अलावा भी कुछ ऐसे महत्त्वपूर्ण श्लोक हैं जो 'गीता' के मर्म पर विस्तृत प्रकाश उठाते हैं। इस पुस्तक में ऐसे महत्त्वपूर्ण श्लोकों को बीच-बीच में दिया गया है, ताकि पुस्तक की उपयोगिता बनी रहे। पुस्तक का प्रारम्भ धृतराष्ट्र द्वारा उसके मंत्री संजय से युद्ध का हाल पूछने से होता है। संजय को दिव्य-दृष्टि प्राप्त थी। हमारा लक्ष्य है कि 'गीता' का सार सभी धर्मों के व्यक्तियों तक पहुँचे और भारतीय-संस्कृति के इस गौरव ग्रन्थ की उपयोगिता, सभी को जीवन में सद्विवेक के मार्ग पर ले जाने में सहायक हो।

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