Sarhad Paar Se...
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Dr. Mahendra Mittal
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महेन्द्र मित्तल के विभिन्न महत्त्वपूर्ण प्रकाशकों के यहाँ से अब तक आठ उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। 'सरहद पार से...' इनका नवाँ उपन्यास है। महेन्द्र मित्तल मूलतः साहित्यकार हैं। इन्होंने हिन्दी साहित्य में एम.ए., पी-एच, डी. तक ही शिक्षा ग्रहण की है। हापुड़ नगर के एक सम्भ्रान्त वैश्य परिवार में 12 जून 1933 को जन्मे महेन्द्र मित्तल की साहित्य के प्रति रुचि, किशोरावस्था से ही प्रारम्भ हो चुकी थी। सन् 1959 में पहला उपन्यास 'भगी पलकें' एस. चाँद एण्ड कम्पनी, दिल्ली से प्रकाशित हुआ, जो वर्षों तक केरल, गुजरात और महाराष्ट्र में स्नातक स्तर की कक्षाओं में पढ़ाया जाता रहा। अन्य विधाओं में दो नाटक, दो कहानी संग्रह, एक शोध ग्रन्थ (पुरस्कृत), तीस से ऊपर विभिन्न महत्त्वपूर्ण विषयों पर पुस्तकें, सौ से ऊपर बाल-साहित्य की पुस्तकें, लोक कथाएँ और चित्रकथाएँ आदि प्रकाशित हो चुकी है। विविध पत्र, पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित होते रहे हैं। सम्प्रति 'उद्योग प्रभात' (पा०) और 'अन्धा युग' (सा०) पत्रों का सम्पदान और प्रकाशन गत पन्द्रह वर्षों से कर रहे हैं। रचनाधर्मिता इनके जीवन का अंग बन चुकी है, जो इन्हें इस उम्र में भी सजग और सक्रिय बनाए रखती है। प्रस्तुत उपन्यास 'सरहद पार से..' महेन्द्र मित्तल की कश्मीर पृष्ठभूमि पर लिखा ऐसा उपन्यास है, जो कितने ही प्रश्न भारतीय जन मानस के सामने खड़ा करता है और उन्हें इन प्रश्नों के समाधान के लिए सचेत करता है।
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Dr. Mahendra Mittal
