Sena Pramukh Ka Aakhiri Kadam
Sena Pramukh Ka Aakhiri Kadam
Rampal Singh
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फील्ड मार्शल क्लॉड आकिन लेक की नियुक्ति सर्वोच्च कमाण्डर पद पर की गई तथा जनरल सर रॉबर्ट लोकहार्ट को भारतीय सेना का कमाण्डर-इन-चीफ बनाया गया। 01 जनवरी, 1948 को दूसरे ब्रिटिश सैन्य अधिकारी जनरल सर राय बूचर को भारतीय सेना का कमाण्डर-इन-चीफ बनाया गया। वे इस पद से 01 जनवरी, 1949 को सेवानिवृत हो गए। उनके स्थान पर करिअप्पा को भारतीय सेना का कमाण्डर-इन-चीफ बनाया गया। उस समय इस पद का अर्थ था तीनों सेनाओं-थल सेना,जल सेना, वायुसेना की कमाण्ड सँभालना। 01 अप्रेल, 1955 को कमाण्डर-इन-चीफ पद को चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ में बदल दिया गया, अत: जनरल राजेंद्र सिंह जी कमाण्डर-इन-चीफ तथा चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ पद से जाने गए। अभी 26 वें आर्मी चीफ जनरल वी. के. सिंह जो इस पद पर 26 माह तक रहे। आर्मी चीफ 62 वर्ष की आयु तक तथा अधिकतम 3 वर्ष तक इस पद पर रहते हैं जो भी इनमें से पहले हो। जनरल वी.के. सिंह ने 31 मार्च, 2010 को यह पद सँभाला। वह एक साहसिक, ईमानदार, बेबाक छवि के व्यक्ति हैं परन्तु उनके कार्यकाल में उनकी उम्र के विवाद को लेकर एक समस्या पैदा हुई।
यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा परंतु उन्होंने बहुत ही समझदारी से काम लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अपनी सहमति प्रकट की जिस कारण उन्हें एक वर्ष पहले ही यह पद छोड़ना पड़ा। उस विवाद का वर्णन इस पुस्तक में विस्तार से किया गया है। इसी के साथ ‘घूस की पेशकश’ उन्हें की गई जिसको उन्होंने रक्षा मंत्रालय के सामने रखा जो प्रकरण अब तक भी निपटने का नाम नहीं ले रहा है। इन विवादों पर अनेक स्तम्भकारों, सामरिक विशेषज्ञों ने अपने लेख अखबारों में प्रकाशित किए, अनेक सम्पादकीय लेख लिखे गए। इन सभी लेखों को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक का लेखन-कार्य प्रारम्भ हुआ। सर्वोच्च न्यायालय में उन-विवाद का फैसला जानने के लिए पढ़िए- सेनाध्यक्ष का आखिरी कदम।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392733536
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
No. of pages
No. of pages
256
Book Dimension
Book Dimension
22.5 cm x 15 cm x 1.9 cm
Item Weight
Item Weight
495 grams
